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काला जादू ( 20 )

काला जादू ( 20 )

" चोलिए मैं आपको लेकोर चोलता हूँ... " कहकर वह पुलिस कर्मी उठकर जाने लगा, इस दौरान प्रशांत भी उसके पीछे पीछे ही आ रहा था।

वह पुलिस कर्मी प्रशांत को एक कमरे में लेकर गया, उस कमरे के बाहर से चीखों की आवाज़ आ रही थी , वह आवाजें सुनकर प्रशांत को घबराहट महसूस होने लगी।

उस कमरे के अंदर बहुत सारी लाॅकअप बनी हुई थी जिसमें से कई खाली थी और कुछ में कुछ लोग थे, उन सभी लाॅकअप के अंदर एक लकड़ी की स्टूल के ऊपर एक छोटे घड़े के ऊपर स्टील का गिलास रखा हुआ था।

हर लाॅकअप में घड़े के बाईं या दाईं तरफ एक लकड़ी की लम्बी सी चारपाई रखी हुई थी।

प्रशांत को वहाँ आता देखकर वहाँ लाॅकअप के सारे लोग उसी को घूर रहे थे ,प्रशांत उन सब पर ध्यान ना देते हुए उस पुलिस इंस्पेक्टर के पीछे पीछे आगे बढ़ता रहा।

वह पुलिस कर्मी सीधा सीधा चलते जा रहा था, उसके दाईं और बाईं दोनों तरफ ही लोहे की सलाखें लगे छोटे छोटे सेल बने हुए थे, जिनके अंदर बंद लोग उन्हें जाते हुए निरंतर घूर रहे थे।

वह इंस्पेक्टर प्रशांत के साथ उस लाॅकअप में सबसे आखिर तक आ गया, वहाँ से दाईं ओर बाईं दोनों तरफ एक एक पतला गलियारा जा रहा था, वह इंस्पेक्टर प्रशांत के साथ दाईं तरफ के गलियारे की तरफ बढ़ जाता है, उस गलियारे के सामने के तरफ ही एक दरवाजा था।

वह इंस्पेक्टर उस दरवाजे को खोलते हुए अंदर की तरफ बढ़ गया।

उस दरवाजे के दूसरी तरफ भी लाईन से कुछ सेल बनी हुई थी, लेकिन इसमें जितने भी कैदी थे सब की सब महिलाएँ ही थी।

वहाँ आते आते चीखों की आवाज़ भी काफी तेज हो गई थी जिसके कारण प्रशांत के दिल की धड़कन काफी बढ़ गई थी।

उस लाॅकअप में और अंदर आने पर प्रशांत ने पाया कि दो महिला सिपाही रूपा और लक्ष्मी को बुरी तरह से मार रहे, इस दौरान वह दोनों रोते हुए चीख रहे थे ।

यह देखकर प्रशांत उन्हें बचाने के लिए उनके पास जाने ही वाला था कि तभी रूपा गिड़गिड़ाते हुए बोली " और मोत मारो प्लीज़... होम बोताता है सोब.... "

यह सुनकर प्रशांत अपनी जगह पर रूक गया क्योंकि उसे जानना था कि रूपा आखिर क्या बताने वाली है, इसी दौरान एक महिला पुलिस कर्मी ने रूपा का मुँह पकड़ कर कहा " हाँ बोल जोल्दी... "

" वो विंशती होमारा माँ का शोहेली का बेटी है, उशका भाई कोल शुबह होम को बोला कि उशका बहिन विंशती होमशे ओच्छा है क्योंकि उशका चार लोड़कों का शाथे चोक्कर नहीं है.... इशलिए होमने और माँ ने प्लान बोनाया ...."

" कैशा प्लान?" उस महिला पुलिस कर्मी ने सख्ती से पूछा।

" होमारा एक बॉयफ्रेंड है राहुल..... होमने उशे बोला कि प्रोशांतों दादा जोब विंशती को लेने आता है उश दौरान विंशती काॅलेज के बाहर रहता है इशी दौरान उशे पीछे से एकदम शे आकोर विंशती को गोले लोगाकोर भाग जाना है, और उशको ऐशा दिखाना है जैशा वो प्रोशांतों दादा को देखकर डोर कर भागा था। उशने ऐशा ही किया, इशशे प्रोशांतों दादा को लोगा कि विंशती का उशके शाथे चोक्कर चोल रहा है ,इशलिए वो विंशती को घोर लाया और घोर लाकोर दादा ने विंशती को खूब मारा , और उशका बाद क्या हुआ वो तो आपको पोता ही है..... " रूपा ने कहा।

यह सुनकर प्रशांत को बहुत गुस्सा आया और वह गुस्से में उस सेल में गया जहाँ रूपा और लक्ष्मी उन दोनों महिला पुलिस कर्मियों के साथ मौजूद थी ।

उस सेल का दरवाजा खुला हुआ था , इसलिए प्रशांत गुस्से में उस सेल के अंदर घुसा और रूपा को एक थप्पड़ जड़ते हुए कहा " होमने तुमको बोला तो तुम उशका बोदला होमशे लेता होमारा विंशती ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था ?"

प्रशांत की बात सुनकर रूपा कुछ ना कह सकी और अगले ही पल प्रशांत के साथ आए उस पुलिस कर्मी ने प्रशांत का हाथ पकड़ कर बाहर खींचते हुए कहा " आप बाहर चोलिए.... ऐशा औरतों पोर हाथ नहीं उठाना..... " यह सुनकर प्रशांत ने उस पुलिस कर्मी से आपना हाथ छुड़वाया और बाहर की तरफ गुस्से में बढ़ गया।


वर्तमान में

" किंतु रूपा ने होमारा शाथे ऐशा क्यों किया? "विंशती ने रोते हुए कहा, इस दौरान प्रशांत ने उसे गले लगाया हुआ था।

" वो होमशे बोदला लेना चाहता था इशलिए... होमको माफ कोर दो विंशती इतना बुरी तोरह शे मारना का लिए..... " प्रशांत ने रोते हुए विंशती के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा।

" होमने आपको माफ कोर दिया दादा..... " विंशती ने रोते हुए कहा।

इस दौरान अश्विन वहीं दरवाजे पर ही खड़ा हुआ था , कुछ देर बाद प्रशांत अश्विन के पास आया और कहा " तुम भी होमको माफ कोर दो दादा.....गुश्शा में होम आपको पोता नहीं क्या क्या बोल गया.... "

अश्विन ने मुस्कुराते हुए प्रशांत के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा " कोई बात नहीं....इसी बहाने मुझे पता तो चला कि तुम्हें भी गुस्सा आता है.... "

" लेकिन दादा शोत्ति ओगर तुम कोल होमशे विंशती को नहीं बोचाता तो आज होम बहुत पोक्षता रहा होता.... "

" अरे कोई बात नहीं.....मुझे उन दोनों पर शुरू से ही शक था इसलिए ही तो मैंने उस पुलिस इंस्पेक्टर को उन दोनों को उठवा कर उगलवाने के लिए कहा एंड गेस व्हाट मेरा शक बिल्कुल सही था। "

यह सुनकर विंशती ने कुछ सोचते हुए कहा " लेकिन ओगर इन शोब में उन दोनों का हाथ नहीं होता तो? "

" उतना रिस्क तो मैं ले ही सकता हूँ.....वैसे प्रशांत वे दोनों हैं कहाँ पर? "

" पोता नहीं.... शायद पुलिस स्टेशन में ही होंगे .... होमको पोता नहीं है और जानना भी नहीं है , वैशे भी ऐशे लोगों को घोर में रोखने का मोतलब है आश्तीन में शाँप पालना। " ये कहते समय प्रशांत की आवाज़ में एक रोष आ गया।

अब अश्विन ने कुछ देर बाद कहा " आप लोग विंशती के पास रहिए मैं घर जाकर थोड़ा आराम कर लेता हूँ, कल रात से यहाँ जाग रहा हूँ।"

" हाँ ठीक आछे दादा, वैशा भी आपको हमारा वोजह शे खामोखाँ तोकलीफ हुआ ।" प्रशांत ने कहा।

" कोई बात नहीं.... तुम अपना और विंशती का ख्याल रखना मैं चलता हूँ। " कहकर अश्विन ने विंशती के पास से अपना मोबाइल लिया और फिर उस कमरे से बाहर चला गया।

उसके जाने के बाद शुमा ने मुस्कुराते हुए कहा "आश्विन की भालो मानुष ना प्रोशांतों? "

" हाँ माँ इशमें तो कोई शोक नहीं है...." प्रशांत ने मुस्कुराते हुए कहा।


अगले दिन दोपहर को विंशती को अस्पताल से डिस्चार्ज मिल जाता है फिर प्रशांत और शुमा उसे घर वापस लेकर आ जाते हैं।

सोसायटी में जब वह तीनों पहुँचते हैं तो वहाँ के सारे ही लोग आते जाते हुए उन्हें ही घूरते हुए कुछ फुस्फुसा रहे थे।

प्रशांत को पता था कि वह उन्हें क्यों घूर रहे हैं लेकिन फिर भी वह उनको नजरअंदाज करते हुए अपने फ्लैट की तरफ बढ़ने लगा।

फ्लैट में आकर विंशती अपने कमरे में आकर आराम करने लगी और प्रशांत हाॅल में बैठकर कुछ सोचने लगा।

प्रशांत काफी चिंतित लग रहा था, उसे यूँ देखकर शुमा ने उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा " कि होलो प्रोशांतों? पोड़ेशान लोग रहा है.... "

" माँ इश माशी और रूपा का ये होरकोत का वोजह से कहीं विंशती का शादी अभिमन्नो के साथे टूट ना जाए ।" प्रशांत ने चिंतित स्वर में कहा।

"ऐशा कैशा होगा? विंशती का चोक्कर थोड़ी है किशी का भी शाथे..." शुमा ने कहा, ये कहते समय उसकी आवाज में चिंता साफ ज़ाहिर हो रही थी।

" ये बात होम जानता है माँ, लेकिन लोगों को तो पूरा शोच नहीं पोता ना ..... होमको तो डोर है कि कहीं कोई जाकोर अभिमन्नो और उशका माँ बाबा का कान ना भोर दे।"

" ऐशा कुछ नहीं होगा प्रशांतो.... एक काम कोरता है होम विंशती का शादी अभिमन्नो शे इशी शाल कोरवा देता है । "

" किंतु माँ विंशती तो ओभी उन्नीश साल का ही है और उशका और अभिमन्नो का पोढ़ाई भी तो पूरा नहीं हुआ ओभी। "

" पुराना टाईम में लोड़की का शादी ब्याह दोस दोस शाल का उम्र में हो जाता था, विंशती तो फिर भी उन्नीश का है और वो कानून का हिशाब से बालिग है तो शादी कोर शोकता है। "

" किंतु माँ अभिमन्नो का घोरवाला पूछेगा नहीं कि इतना जोल्दी क्यों कोरवा रहा है दोनों का शादी? "

" अरे बोल होम बोल देगा कि होमारा उम्र हो गोया है इशलिए होम जोल्दी शे जोल्दी विंशती का शादी होते देखना चाहता है। "

" होमारा मोन नहीं मानता माँ इतना जोल्दी विंशती का शादी कोरवाने का.... "

"होमको भी ओच्छा नहीं लोग रहा लेकिन ये शोब होम विंशती का भोलाई के लिए ही तो कोर रहे हैं ... "

" हाँ तुम ठीक कहता है माँ , तो होम कोल ही अभिमन्नो का घोरवाला शे इश बारे में बात कोरता है। "


उन दोनों की बातचीत के दौरान विंशती अपने कमरे में गहरी नींद में सो रही थी, कि तभी अचानक से विंशती की नींद खुलती है ।

नींद खुलते ही वह पाती है कि वह अपने बेड पर ना होकर अपनी बाल्कनी की कुर्सी पर थी।

विंशती को समझ नहीं आ रहा था कि वह यहाँ कैसे आई क्योंकि उसे याद है कि वह अपने बिस्तर पर ही सो रही थी ।

विंशती इसी उधेड़बुन में ही थी कि तभी बाजू की बाल्कनी में अश्विन सफेद टीशर्ट और नीली लोअर में हाथ में सफेद कॉफी का मग लिए वहाँ आता है ।

विंशती को यूँ चिंतित देखकर अश्विन ने उससे मुस्कुराते हुए कहा " क्या हुआ विंशती ? तुम इतनी परेशान क्यों लग रही हो? सब ठीक तो है ना? "

इस पर विंशती ने कहा " पोता नहीं होमारा शाथे क्या हुआ ओभी? "

" क्या मतलब? "अश्विन ने आश्चर्य से पूछा।

"होम ओभी अपने बिश्तोर पोर शो रहा था पोता नहीं कैशा यहाँ आ गया... "

इस पर अश्विन हँसने लगा, उसे यूँ हँसता देखकर विंशती ने कहा " आपको लोग रहा है कि होम मोजाक कोर रहा है? "

" अरे बिल्कुल भी नहीं अच्छा तुमने मुझे ये बात बताई तो मैं भी तुम्हें कुछ दिखाऊँ? "

" ऐशा क्या दिखाएगा आप? "विंशती ने हैरानी से कहा।

" वो तो तुम्हें अभी पता चल ही जाएगा.... तो दिखाऊँ? " अश्विन ने एक कुटिल मुस्कान के साथ कहा।

" हाँ...ठीक है.... " विंशती ने हाँ में सिर हिलाते हुए कहा।

और विंशती के ऐसा कहते ही अश्विन का पूरा शरीर लाल रंग में परिवर्तित होने लगा , उसकी आँखों की पुतलियों का रंग पूरी तरह से सफेद पड़ गया , धीरे धीरे उसके शरीर का आकार बढ़ने लगा , उसकी कसरती भुजाएँ और बड़ी ही गई और देखते ही देखते उसकी टीशर्ट उसकी भुजाओं पर कसते हुए फट गई , उसकी छाती और कमर के हिस्से की टीशर्ट भी शरीर का आकार बढ़ने से जगह जगह से कसते हुए फट गई थी अब उसके शरीर पर ऊपरी भाग पर उस सफेद टीशर्ट के चिथड़े रह गए थे और उसके निचले भाग पर लोअर थी जो कि अश्विन के बलशाली शरीर पर काफी कस रही थी ।

देखते ही देखते अश्विन विंशती की आँखों के सामने एक लाल रंग के दस फीट किसी माँसल प्राणी में बदल गया।

अश्विन को इस तरह परिवर्तित होता देखकर विंशती बिल्कुल सहम सी गई, वह अपनी जगह से उठकर पीछे हटने लगी ।

विंशती इसी तरह से पीछे हटते हुए अपनी बाल्कनी के पीछे तक आ पहुँची, इस दौरान उसकी आँखों में अश्विन के लिए भय साफ दिखाई दे रहा था।

अचानक से लाल प्राणी का रूप धारण किए हुए अश्विन ने अपनी बाल्कनी से एक ऊँची छलाँग मारी, और इसी के साथ ही वह विंशती के सामने उसकी बाल्कनी में आ पहुँचा।

वहाँ आते ही वह एक कुटिल मुस्कान के साथ विंशती के पास आने लगा।

अश्विन को इस तरह से अपने इतने पास आता देखकर विंशती बिल्कुल सहम सी गई लेकिन फिर अगले ही पल उसने खुद को संभालते हुए अश्विन से कहा " होमारा पाश मोत आना.... "

" अच्छा.... वरना क्या कर लोगी? "अश्विन ने शैतानी हँसी हँसते हुए कहा इस दौरान उसकी आवाज काफी भारी भी हो गई थी ।

यह सुनकर विंशती को अब पहले से ज्यादा डर लगने लगा था ,उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब वह आखिर करे तो करे क्या? "

फिर अगले ही पल विंशती की नजर अपनी बाल्कनी के उस दरवाजे पर गई जो फ्लैट के अंदर की ओर जाता था।

क्रमश:....... रोमा.........

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